बिना ज़मीन जंगल पानी के ..हम कहाँ जायें ?

प्रत्यक्षा ऐसा समय है किसी का किसी पर विश्‍वास नहीं । आप पर मेरा और आपको मेरा विश्‍वास नहीं । उस दूसरे पर तो हम दोनों को ही भरोसा नहीं जो अपनी पहचानी भूमिका, बहत हद तक हमारे ओर से आरोपित, से अलग किसी नयी शक्‍ल में हमारे सामने आ रहा है। उसकी शक्‍ल क्‍या बनती है से... [पूरी पोस्ट]
writer Pratyaksha
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[09 Apr 2010 16:12 PM]

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