कहानी मुट्ठी में बंद चाकलेट

shabdon ke akshat o. स्वाति तिवारीअभी ठीक से नींद खुली भी नहीं थी कि किसी ने फोन घनघना दिया। एक बार तो मन में आया, बजने दूं अपने आप बंद हो जाएगा। सुबह-सुबह कौन नींद खराब करे। सर्द रात में सुबह-सुबह ही तो अच्छी लगती है नींद, जब बिस्तर गरमा जाता है रातभर में। एक बार बाहर... [पूरी पोस्ट]
writer swati
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[09 Apr 2010 14:21 PM]

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