A poetess blog
हर एक बुत के आगे झुकाते रहे सरवो दर हो हमारा, या किसी और का दरशहर कोई भी हो, किसी का भी हो घर क्या जाने खुदा मिल ही जाये कहीं पर...
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ranjana
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[09 Apr 2010 13:21 PM]



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