विधवा-शहीद
सफेद वस्त्रों में लिपट गयी छोड़ कर जीवन के रंग एक ही सवाल है बस मन में क्यों गए मेरे पिया छोड़ मेरा संग रात होती थी पहले दिन के बाद अब तो दिन भी लगते हैं रात इंतज़ार का दुःख भी खत्म हुआ बचा शेष तो सिर्फ अवसाद जननी...
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Tej Pratap Singh
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[09 Apr 2010 12:10 PM]



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