द्विपदी ग़ज़ल: ...बाँच सके तो बाँच. --संजीव 'सलिल'
सत्य सनातन नर्मदा, बाँच सके तो बाँच.मिथ्या सब मिट जाएगा, शेष रहेगा साँच..कथनी-करनी में तनिक, रखना कभी न भेद.जो बोया मिलता वही, ले कर्मों को जाँच..साँसें अपनी मोम हैं, आसें तपती आग.सच फौलादी कर्म ही सह पाता है आँच..उसकी लाठी में नहीं, होती है आवाज़.देख न...
[पूरी पोस्ट]
दिव्य नर्मदा divya narmada
samyik hindi kavita
11
0
0
0
4
[09 Apr 2010 09:48 AM]



Shuffle








