साहित्य सर्जक
'ज़िंदा ज़ख्म' की नायिका का मूर्त रूप हैं- फ़िरदौस ख़ान सच वास्तव में यदि सच हो तो वह इस मायावी जगत में जितना सुनना कड़वा होता है उतना उसे कहना या व्यक्त करना होता है. सच को कहने के लिए पहाड़ जैसा साहस चाहिए, समुद्र जैसी गंभीरता व गहनता चाहिए, नदियों...
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vedvyathit
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[09 Apr 2010 09:24 AM]



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