मेरे प्यार को तू झूठी तोहमत न लगा
तेरे दिल में जब वफ़ा का नाम नहीं है फिर तुझे गैरो से वफ़ा क्यों मिलेगी. मित्र की नादान दोस्ती को ठुकरा करतुझे फिर दिलों से भी दुआ न मिलेगी.क्या खता हुई मुझसे मुंह मोड़ लेते हो खुशियाँ देने आये बदले में गम मिले.मेरे प्यार को तू झूठी तोहमत न लगा मेरे जैसा...
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महेन्द्र मिश्र
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[09 Apr 2010 09:20 AM]



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