कविता- आँखन देखी- कागद लेखी
आँखन देखी- कागद लेखी[क्रांति हमारी रही कागज़ों पर] वीरेन्द्र जैन उतरा है आकाश कागजों पर पतझर ओ’ मधुमास कागजों परकागज़ के नक्शे पर देश बना करते रहे विकास कागजों परनिकली सभी भड़ास कागजों परहोते रहे प्रयास कागजों परवे सबके सब आतंकी घोषित जो न करें विश्वास...
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वीरेन्द्र जैन
कविता
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[09 Apr 2010 06:01 AM]



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