मारीच
अंत की ओरभर-भर चौकड़ीचला मारीचसानंदमृत्यु के निमंत्रण परमोक्ष की पुकार पेस्नेहसिक्तभरता कुलाचेराम नेह पगाराम मयराम के लिएसंजोयेअभंग,अखंड प्रेमप्रेमसींचता है,खींचता हैजन्म-जन्मान्तरनिरंतरअपनी ओर ……छली ,पातकी जग जाने……राम कथा सुनते-सुनते…हम जाने-प्रेमी...
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पारूल
मेरे फ़ितूर
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[09 Apr 2010 05:56 AM]



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