मारीच

parul chaand pukhraaj kaa..... अंत की ओरभर-भर चौकड़ीचला मारीचसानंदमृत्यु के निमंत्रण परमोक्ष की पुकार पेस्नेहसिक्तभरता कुलाचेराम नेह पगाराम मयराम के लिएसंजोयेअभंग,अखंड प्रेमप्रेमसींचता है,खींचता हैजन्म-जन्मान्तरनिरंतरअपनी ओर ……छली ,पातकी जग जाने……राम कथा सुनते-सुनते…हम जाने-प्रेमी... [पूरी पोस्ट]
writer पारूल

मेरे फ़ितूर

views
31
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
12
[09 Apr 2010 05:56 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix