गिरते हैं शहंशाह ही मैदाने जंग में
हम तो हमेशा तलवार की धार परसाथ चलेजब मैं कटी तो तुम भी लहुलुहान थेमैंने तुम्हें पट्टी बाँधीतुमने मुझे और प्यार के इस मरहम सेमुस्कुराने लगेजब मेरे सामान फेंके गए उसमें तुम्हारे नन्हें खिलौने भी थेमैंने तेजी से तुम्हारे खिलौने उठायेआँचल से पोछ बक्से में रख...
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रश्मि प्रभा...
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[09 Apr 2010 04:44 AM]



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