जिंदगी के रंग
मैंने कई बार तुम्हे,
करवात बदलते देखा,
कभी हँसते,कभी रोते,
कभी सँवरते देखा,
हाँ,मेरी जिंदगी मैंने,
तुझे प्रतिपल निखरते देखा.... अक्सर जब मैंने अकेलेपन में,
खामोशियों को टहलते देखा,
अपने हालातों से लड़ने में,
आदमी को बनते-बिगड़ते देखा.. पाने की प्रतिपल...
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Astha
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[09 Apr 2010 03:20 AM]



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