सोचती हूँ तुमसे किनारा कर लूं...........
सोचती हूँ तुमसे किनारा कर लूं..........क्यूँ इतना आश्चर्य क्यूँ...........चलो तुम्हारा आश्चर्य करना कुछ तो वाजिब है। वैसे भी तुम मेरे साथ थे ही कब??? जब साथ ही नहीं तो मुझे जाना ही कहाँ?? तुमको शायद याद भी न हो पर मेरे जेहन में तो वो पल आज भी वहीँ का...
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Shikha Deepak
जिन्दगी
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[09 Apr 2010 02:47 AM]



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