उतावले शब्द
उतावले शब्द सजल नयनों की भाषा में थी अजीब निराशा निराशा में छुपा था नवीन सपनाअनदेखा दृश्य कुछ कहानियाँ, बातें और मस्तक की सिलवटों के पीछे नेत्र जिनमें बसा था एक शहर सुनसान उन अधरों पर थे अनगिनत उतावले शब्द जो पड़े रहे, अटके रहे कई...
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SURINDER RATTI
कविता
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[09 Apr 2010 02:55 AM]



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