ज्योतिष इन्सान को परिस्थितिजन्य विवशताओं से मुक्त होने का मार्ग सुझाता है!!!!!!
प्रकृ्ति यानि--संतुलन। यह वस्तुत: वह अवस्था है जहाँ व्यवस्था अपने शुद्ध रूप में रहती है। असंतुलन, अव्यवस्था जैसी व्यवस्थायें विकृ्तियाँ मानी जाती हैं। हमारे जीवन में अनुकूल-प्रतिकूल, उत्थान-पतन, हर्ष-विषाद जैसी स्थितियाँ आती ही रहती हैं। ये जीवन के लक्षण...
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पं.डी.के.शर्मा"वत्स"
उपाय
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[09 Apr 2010 02:26 AM]



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