उनकी ज़िन्दगी के वो रूमानियत भरे दिन (1.)
पिताजी ने पढ़ाई पूरी करते ही घर छोड़ दिया था. वे वहाँ से बाहर निकलकर कुछ करना चाहते थे और अपनी ज़िन्दगी अपने ढंग से जीना चाहते थे. गाँव की कुरीतियों और अन्धविश्वासों से उनका मन भी ऊबा था. फिर तब खेती में बहुत श्रम करने पर भी कम आय होती थी और सिर्फ़ लोगों...
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aradhana
यादेंजीवनअम्माबाबूजी
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[22 Mar 2010 21:10 PM]



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