उनकी ज़िंदगी के वो रूमानियत भरे दिन (2.)
हिन्दी सिनेमा का स्वर्णकाल (पचास और साठ के दशक) पिताजी के जीवन का भी स्वर्णकाल था क्योंकि वे उस समय युवा थे और नयी-नयी शादी हुयी थी. अपने खानदान क्या, पूरे गाँव में अपनी पत्नी को अपने साथ शहर लाने वाले पिताजी पहले युवक थे. नहीं तो उस समय पिया लोग कमाने...
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aradhana
यादेंजीवनअम्माबाबूजी
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[24 Mar 2010 16:23 PM]



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