उनकी ज़िन्दगी के वो रूमानियत भरे दिन (3.)
मेरी अम्मा अधिक पढ़ी-लिखी नहीं थी. सिर्फ़ पाँचवाँ पास थीं. पहले लोग अपनी लड़कियों को अक्षरज्ञान करा देते थे, जिससे कि वे चिट्ठी लिख सकें. अम्मा को भी चिट्ठी लिखने भर की शिक्षा मिली थी. पिताजी जब उन्हें साथ लेकर आये तो पढ़ाना शुरू कर दिया. अम्मा का जी...
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aradhana
यादेंअम्माबाबूजी
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[29 Mar 2010 21:59 PM]



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