इलज़ाम का डर...

क्या करूँ मुझे लिखना नहीं आता... हर बात ज़ुबाँ पे लाते हैं सोच समझ कर,जाने किस लफ्ज़ का मतलब क्या क्या निकले,बेवजह हँसने का ईलज़ाम दिया सबने,जब भी हम लबों पे मुस्कान सजा निकले,निकले थे हम तो देने दिल से खुशी सबको,ये सोचकर कि हम हैं हिस्सा उन की ज़िन्दगी का,दिल टूट गया जब ये देखा,अन्जान हैं... [पूरी पोस्ट]
writer Gurnam Singh Sodhi
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[09 Apr 2010 01:34 AM]

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