उस दिन का पागलपन

खुली खिड़की दो बजे में कुछ मिनट बाकी थे, और स्कूल की छुट्टी वाली घंटी बजने वाली थी, लेकिन हम दूसरे गाँव से पढ़ने आते थे, इसलिए हमारे लिए स्कूल की छुट्टी वाली घंटी से ज्यादा महत्वपूर्ण था बस का हॉर्न। उस दिन जैसे ही बस ने गाँव के दूसरे बस स्टॉप से हॉर्न  दिया, तो... [पूरी पोस्ट]
writer Kulwant Happy

मैं

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[09 Apr 2010 01:20 AM]

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