चाणक्य दर्शन-पैसा जोड़ने से ही शांति नहीं मिलती

अमृत संदेश-पत्रिका धनेषु जीवतिव्येषु स्त्रीषु चाहारकर्मसु। अतृप्तः प्राणिनः सर्वे याता यास्यन्ति यान्ति च।। हिन्दी में भावार्थ- धन और भोजन के सेवन तथा स्त्री के विषयों में लिप्त रहकर भी अनेक मनुष्य अतृप्त रह गए, रह जाते हैं और रह जायेंगे। किं तया क्रियते लक्ष्म्या या... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

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[08 Apr 2010 23:26 PM]

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