पतंजलि योग दर्शन-अभ्यास से ही चित्त दृढ़ होता है (patanjali yog darshan-abhyas

शब्दलेख सारथी अभ्यासवैराग्याभ्यां तन्निरोधः।हिन्दी में भावार्थ-चित्तवृतियों पर नियंत्रण अभ्यास तथा वैराग्य से होता है।तन्न स्थितो यत्नोऽभ्यासः।हिन्दी में भावार्थ-चित्त की स्थिरता के लिये जो प्रयास किया जाता है उसे अभ्यास कहा जाता है।स तु... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

हिन्दू-धर्म

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[08 Apr 2010 22:52 PM]

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