लिख ही दूँगी फिर से प्रेम गीत ....
लिख ही दूँगी फिर कोई प्रेम गीतअभी जरा दामन सुलझा लूं ....ख्वाब मचान चढ़े थेकदम मगर जमीन पर ही तो थेआसमान की झिरियों से झांकती थीटिप - टिप बूँदेंभीगा मेरा तन मनभीगा मेरा आँचलपलट कर देखा एक बारकुछ कांटे भीलिपटे पड़े थे दामन सेखींचते चले आते थेइससे पहले...
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वाणी गीत
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[08 Apr 2010 21:57 PM]



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