Jogeshwar Garg

Jogeshwar Garg कुछ तो हम पागल दीवाने लगते हैं और उधर कुछ आप सयाने लगते हैं भूखी आंतें जब जब कहती रोटी दो नयन बावरे स्वप्न दिखाने लगते हैं सच की कीमत एक ज़रा सा साहस हो और झूंठ को रोज बहाने लगते हैं ताऊ को जब पूछो कल क्या करना है बीते कल की बात बताने लगते हैं जब जब मैं... [पूरी पोस्ट]
writer jogeshwar garg

ghazal

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[08 Apr 2010 15:05 PM]

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