दोस्ती के नाम

JHAROKHA नजदीकियां भी बन जाती हैं दूरियां, जब आपस में यूं ही हो जाती हैं गलतफ़हमियां। क्यूं मूक सी दीवार खड़ी है आज दिलों के दरमियां, कल तक जो डाले हाथों में हाथ करते थे खूब बातियां। भरोसे और विश्वास से ही चलती हैं जिन्दगानियां, इनके बगैर तो जिन्दगी हो जाती हैं... [पूरी पोस्ट]
writer JHAROKHA

कविता

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[08 Apr 2010 14:28 PM]

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