जरूरतें, विश्वास और सपना

मौन के खाली घर मे-                                       ओम आर्य जब तुम घोंप आयेउसकी पीठ में छुरामैंने देखाउसके खून में पानी बहुत थाजिन मामूली जरूरतों को लेकरतुम घोंप आये छुराउन्ही जरूरतों नेकर दिया था उसका खून पानी**तुम बार-बार खोओगेविश्वासकहीं सुरक्षित रख केवे इधर-उधर हो जाते हैंरोजमर्रा कीकुछेक जरूरी चीजों के... [पूरी पोस्ट]
writer ओम आर्य
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[08 Apr 2010 13:53 PM]

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