जरूरतें, विश्वास और सपना
जब तुम घोंप आयेउसकी पीठ में छुरामैंने देखाउसके खून में पानी बहुत थाजिन मामूली जरूरतों को लेकरतुम घोंप आये छुराउन्ही जरूरतों नेकर दिया था उसका खून पानी**तुम बार-बार खोओगेविश्वासकहीं सुरक्षित रख केवे इधर-उधर हो जाते हैंरोजमर्रा कीकुछेक जरूरी चीजों के...
[पूरी पोस्ट]
ओम आर्य
16
1
0
1
9
[08 Apr 2010 13:53 PM]



Shuffle








