श्रद्धांजलि के स्वर में विलाप

युवा दखल कौन चाहता है इन चिरागों को बुझाना?  मुझे भी दुख है उन ग़रीब जवानों की असमय मृत्यु पर…  तब भी होता है जब कहीं दुबकी सी ख़बर  होती है कि आठ नक्सली मारे गये...  तब भी जब दंगे में मारे गयी लाशें अख़बारों में लहू बहाती... [पूरी पोस्ट]
writer अशोक कुमार पाण्डेय

नक्सलवाद

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[08 Apr 2010 13:37 PM]

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