ऐसे भी तड्पाता है कोई यार अपने यार को

दर्पण के टुकड़े या तो वक्त से कहो रोके अपनी रफ्तार कोया मना लाये वो जाके रूठे हुये यार को हर सांस पे लगता है ये अब थमी कि तब थमी ऐसे भी तड्पाता है कोई यार अपने यार को या तो खुद आओ या सांसो से कहो कि आये ना कोई तो राहत मिले तेरे इश्क के नीमार को और दर्द और जख्म हमको वो... [पूरी पोस्ट]
writer Krishan lal "krishan"
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[08 Apr 2010 09:49 AM]

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