एक मुख़्तसर सी मुलाकात....'कैलाश सेंगर' के साथ
पिछले कुछ दिन काफी व्यस्तता भरे थे , एक तो बच्चों की छुट्टियाँ,उनकी फरमाईशें और उनमें आकाशवाणी से एक कहानी की फरमाईश भी शामिल .कई मित्र नाराज़ भी होंगे...उनलोगों के इतने शौक और मेहनत से लिखे पोस्ट्स भी नहीं देख पायी. ब्लॉगजगत में भी रेडियो से जुड़े कई लोग...
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rashmi ravija
आकाशवाणी
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[08 Apr 2010 09:36 AM]



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