शोएब मलिक का बिना तिल का ताड़
शोएब मलिक,समझ में नहीं आ रहा है कि तुम्हें क्या संबोधन करें और तुम्हारे लिए भगवान से क्या कामना करें ? तुमने तो सारे ही मानदंड बदल कर रख दिए । हम हमेशा ही पढ़ाते रहे- तिल का ताड़ बनाना, बात का बतंगड़ बनाना, पर तुमने तो बिना बात का ही बतंगड़ बना दिया,...
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joshi kavirai
shoaib mailk
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[08 Apr 2010 08:01 AM]



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