प्रेम के लिए प्रकृतस्थ होना जरूरी

देख कबीरा बिना प्रकृति का सान्निध्य लिए प्रेम संभव नहीं है। यदि आपको प्रेम करना है तो प्रकृति के बीच जाकर और प्रकृति के रंग में ढ़लकर ही संभव है। यह कहने का यह मतलब यह भी नहीं है कि मैंने कोई शोध किया है अथवा दार्शनिक हो गया हूं। दरअसल, बैठे-बैठे यह विचार आया। एक... [पूरी पोस्ट]
writer सुभाष चन्द्र

प्रेम

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[08 Apr 2010 07:02 AM]

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