दो पड़ोसियों के बीच एक महापड़ोसी

शिवकुमार मिश्र  और ज्ञानदत्त पाण्डेय  का ब्लॉग हलकान भाई के घर जाना पड़ा. जाते भी न कैसे? आज आफिस के लिए तैयार हो रहा था तभी उनका फ़ोन मिला. उन्होंने बताया कि अर्जेंट है इसलिए आज ही उनसे मिलूं. जब मैंने कहा कि शाम को आता हूँ तो भड़क गए. बोले; " कहते तो बड़े भाई हो और बड़े भाई के लिए जरा सा समय नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer Shiv
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[08 Apr 2010 07:05 AM]

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