दुहाई
सब कहतें है रह चुप,उन बातों पर,जिन्हें तू जानती नहीं,जिन्हें देखा नहीं तू ने,जिन्हें तू नहीं पहचान पाई है..नहीं जानती लाल विचारधारा,देखी नहीं मैंने बंदूकें,इस नफरत को पहचानती नहीं,मैं तो घर में बैठे थी चुप चाप,पर इन विचारों ने द्वन्द मचाई है...लाशें छाई...
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Astha
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[08 Apr 2010 05:24 AM]



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