ये मोड़ किस मोड़ पर ? ..............अंतिम भाग

एक प्रयास गतांक से आगे .....................अब निशि मंझधार में फँसी थी जिसका कोई साहिल ना था. अब उसे समझ आ रहा था घर , परिवार , पति , बच्चों का महत्त्व. अब उसे लग रहा था कि वो कैसी झूठी मृगतृष्णा के पीछे भाग रही थी. रंग - रूप , धन -दौलत, ऐशो- आराम कोई मायने नहीं... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
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[08 Apr 2010 02:07 AM]

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