क्या प्रजातांत्रिक संवेदना का अंत हो चुका है

जयप्रकाश मानस सुकमा के चिंतलनार जंगल में जो जवान बर्बरतापूर्वक मारे गये - शोषक नहीं थे, बुर्जुआ नहीं थे, पूँजीवादी नहीं थे । जानलेवा संकट की संपूर्ण संभावना के बाद भी जानबूझकर सीआरपीएफ की नौकरी में थे । ताकि देश में शांति और अमनचैन की निरंतरता बनी रहे । ताकि ख़ुशहाली... [पूरी पोस्ट]
writer जयप्रकाश मानस

प्रजातंत्र

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[08 Apr 2010 00:45 AM]

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