मोहब्बत

कविताओं के मन से मोहब्बत कल तुझे डूबते हुए सुर्ख सूरज के साये मेंफिर एक बार देखा ...रात , बड़ी देर तक तेरा साया मेरे साथ ही था ..एक ख्वाब तेरा चेहरा लिए  ;खुदा के घर से दबे पाँव मेरी नींद की आगोश में सिमट आया ...और रात की गहराती परछाईयो  ने ;तुझे और मुझे ;अपने... [पूरी पोस्ट]
writer Vijay Kumar Sappatti
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[08 Apr 2010 00:49 AM]

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