धीरे-धीरे चल री पवन - डा. कुमार विश्वास (Dheere-Dheere Chal Ree Pawan)

कोई दीवाना कहता है  - डा. कुमार विश्वास धीरे-धीरे चल री पवन मन आज है अकेला रेपलकों की नगरी में सुधियों का मेला रे धीरे चलो री आज नाव ना किनारा है नयनो के बरखा में याद का सहारा है धीरे-धीरे निकल मगन-मन, छोड़ सब झमेला रे पलकों की नगरी में सुधियों का मेला रे होनी को रोके कौन, वक्त से बंधे हैं... [पूरी पोस्ट]
writer हरि शर्मा
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[08 Apr 2010 00:11 AM]

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