तुम्हे प्रेम करते हुए अहर्निश
तुम्हें प्रेम करते हुए अहर्निशगुज़र जाना चाहता हूंसारे देश- देशान्तरों सेपार कर लेना चाहता हूंनदियां, पहाड़ और महासागर सभीजान लेना चाहता हूंशब्दों के सारे आयामध्वनियों की सारी आवृतियांदृश्य के सारे चमत्कारअदृश्य के सारे रहस्य.तुम्हे प्रेम करते हुए...
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अशोक कुमार पाण्डेय
पुरानी कविता
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[07 Apr 2010 23:31 PM]



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