GIDHH

GIDHH एक क्रांति बनकर सारी दुनिया बदल जाऊंगादो-चार पंख क्या काट लिएसोचते हो मैं उड़ना भूल जाऊंगा...हौसलों की उड़ान अभी बाकी है...तुम देखनाएक दिन...आसमान छूकर आऊंगा।अपनी हद से भी गुजरकर देख लो...मैं नहीं डरूंगा...तुम्हारे बीच से निकलूंगा....और तुम्हारा गढ ढ़हा... [पूरी पोस्ट]
writer अमिताभ बुधौलिया 'फरोग'
views
14
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
1
[07 Apr 2010 15:19 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix