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एक क्रांति बनकर सारी दुनिया बदल जाऊंगादो-चार पंख क्या काट लिएसोचते हो मैं उड़ना भूल जाऊंगा...हौसलों की उड़ान अभी बाकी है...तुम देखनाएक दिन...आसमान छूकर आऊंगा।अपनी हद से भी गुजरकर देख लो...मैं नहीं डरूंगा...तुम्हारे बीच से निकलूंगा....और तुम्हारा गढ ढ़हा...
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अमिताभ बुधौलिया 'फरोग'
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[07 Apr 2010 15:19 PM]



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