सोचो ! जो हम परिंदे हो जाए

एक नीड़ ख्वाबों, ख्यालों और ख्वाहिशों का कभी - कभी यूँ हीउठ जाते हैं दिल मेंमासूम ख्यालतुम्हारे साथ।उड़ना चाहती हूँपरिंदों जैसे।सोचो !जो हम परिंदे हो जाए।किसी इलेक्ट्रिक वायर परबैठ चूँ-चूँ करें। किसी टेलेफ़ोन टॉवरपर बसेरा हो अपना।घरो के सामनेबहती नाली परदोनों मिलकर पानी पिए।फिर मैं फुर्र से उड़... [पूरी पोस्ट]
writer Priya
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[07 Apr 2010 15:07 PM]

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