रक्तबीज
हर तरफ़ उगे हैं,आइने ही आइने,जिनमे दिखायी पड़ते हैं,अनगिनत प्रतिबिंब।चाहता हूं इनमे दिखें,केवल मोहक मनभावन,पर दिखायी देते हैं,कुंठित और बीभत्स।बीभत्सता जो है सृजित,हमारे कलुषित विचारों से, जो है पोषित पुष्पित पल्लवित,द्वेष लालच व साज़िश से।जब बंद करता हूं...
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विजय प्रकाश सिंह
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[07 Apr 2010 11:57 AM]



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