क्यूँ बोलूं.

Voice Of Heart : पुकार - अंतर्मन की खामोशियों मे कभी चीखने का मन होता है बहुत, पर फिर मन सोचने लगता है की क्या फायदा चीख के.. लोग मिलते हैं तो पूरे मन की व्यथाएं, खुशियाँ सब कुछ बोल देने का मन करता है.. पर फिर सोचता हूँ की आखिर क्या बोलूं और क्यूँ बोलूं... तो इस रचना मे जो दो पंक्तियाँ... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु पन्त
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[07 Apr 2010 11:40 AM]

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