मनीष की कलम से आपके खिदमत मे ....

ये सच है १.वक़्त की बेवफाई देखो कितने सितम ढाए हैंकभी नफरत थी जिस गली से हमे आज वहीँ घर बनाये हैं हमने ।२.हमे सराबी कह कर क्या खूब इलज़ाम लगायाहै तुमने , जरा पैमाने से पूछो हमे ऐसा बनाया हैकिसने ।३.हर मर्ज़ की दवा होती तो दुआओं पे यकीनकौन करता , सबूतों के बिना... [पूरी पोस्ट]
writer मनीष झा
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[07 Apr 2010 09:14 AM]

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