कल मुझे जीतना है!!!
आज सोते सोते मै बडबडाने लगाहल्ला फिर मचाने लगादिन भर के ख्यालातएक द्वन्द्द मचाने लगेशायद कोई हार आज बर्दाश्त न हुई
लड्ने वाला हर चेहराअंधेरे मे गुम सा थामै जीत के लियेहाथ पैर चला रहा थादिल-दिमाग दोनो हीकंही दूर खडे हंस रहे थेमेरी हताशा पर मुझे ही कोस रहे...
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प्रतिबिम्ब बड़थ्वाल
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[07 Apr 2010 08:48 AM]



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