पैरोडी- सिंहासन खाली करो उमाजी आती हैं

virendra jain ke nashtar सिंहासन खाली करो उमाजी आती हैं [रामधारी सिंह दिनकर की स्मृति से क्षमायाचना सहित] वीरेन्द्र जैन ------------------------------------------------------ भोपाली ठंडी बुझी राख सुगबुगा उठी गेरुआ वस्त्र की आग दहकती जाती है दो राह काल के रथ को ये मामा... [पूरी पोस्ट]
writer वीरेन्द्र जैन

उमाभारती

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[07 Apr 2010 07:15 AM]

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