लोग चुप नहीं बैठते
लोग चुप नहीं बैठतेउन दिनों भीजब नर्क की यातनाएं भोगते हैं।जब मुंह अंधेरे, रोज सुबह शामकिसी काली पैसेंजर ट्रेन में डेढ़ घंटे तकअपने ही जिस्म से बलात्कार करते हैं।और फिर दसियों घंटेकिसी बनिये की दुकान परसामान यहां से वहां रखते हुएगंध छोड़ते हुए...
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Rajey Sha
कविता
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[05 Apr 2010 09:20 AM]



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