पुस्तक समीक्षा : एक व्यंग्यात्मक उपन्यास
'महात्मा की बेटी और सियासत' नामक यह संपूर्ण उपन्यास देश की राजनैतिक दुर्दशा की सतत प्रवाहित विडंबनापूर्ण प्रदीर्घ केवल कहानी नहीं है बल्कि गांधीजी की मनोव्यथा का बेबाक प्रकटीकरण भी है। यह विचारोत्तेजक रचना देश की जनता की अपनी त्रासदपूर्ण स्थिति से निकलने...
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bhaarat kumar
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[07 Apr 2010 04:00 AM]



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