दिल ख्वाहिशो का कारखाना है
कहते है दोनों जुड़वाँ है ..अक्सर साथ चलती है .....मसरूफियत की आमद अगर है तो बेख्याली का आना भी तय है ...कहने वाले बेख्याली को "छोटी "कहती है .शायद इसलिए थोडा बागी मिजाज है .कभी कभी बेवजह ..बिना इत्तिला किये दरवाजे पर सुबह से दरवाजे पर आ बैठती है.....कुछ...
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डॉ .अनुराग
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[07 Apr 2010 02:47 AM]



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