मन का पंछी

zakhm ना जाने वो कौन सी बंदिश हैजिसे तोड़ नहीं पाताये मन पंछी- साक़ैद में फ़डफ़डाता उड़ना चाहकर भी उड़ नहीं पातासिसकता तड़पता मचलतापल- पलमगर फिर भीउड़ने की चाहतना जाने कौन से गर्तमें दब गयीकिस खोह मेंछुप गयीऔर... [पूरी पोस्ट]
writer वन्दना
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[07 Apr 2010 02:11 AM]

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