नादां

वीर की कलम से ऐसे नादां की हर ठोकर पर गिरते हैं, फिर भी हम दाना बने फिरते हैं| कौन मरता है किसी के साथ यहाँ, कैसे हमदम जाना बने फिरते हैं| फिर भी हम दाना बने फिरते हैं… कहने को एक घर है पास लेकिन, कितने साये वीराना बने फिरते हैं| फिर भी हम दाना... [पूरी पोस्ट]
writer वीर

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[07 Apr 2010 01:56 AM]

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